रविवार, 8 अप्रैल 2018

विरोध, बंद नहीं साथ खोलने का काम कब

पुलिस गलत, अधिवक्ता गलत, राजनीति गलत, गुस्सा इतना कि देश पूरा पटरी से उतर सा गया है। पुलिस और वकील की एक लड़ाई। जिसमें शायद उन दोनों के पडोसी का भी कोई मतलब न रहा होगा। पर आज पूरा देश इसका दंश झेल रहा। वकील साहब न जाने कितने ऐसे बेगुनाह होंगे जिसे जेल से सिर्फ इस लिए नहीं रिहा किया जा रहा है क्योंकि आप काम नहीं कर रहे। आप का गुस्सा है कि मेरे एक अधिवक्ता भाई को गोली मारी गई है और वो मर गया है। बेशक उस पुलिस वाले को सजा मिलनी चाहिए। आखिर वो रिवाल्वर लेकर कचहरी में आया कैसे। और फिर झगडा हुआ भी आप से तो गोली मारी वो भी गलत। आप तो कानून के संरक्षक हैं। आप के हांथ में सब कुछ है लटकवा दीजिये उसे फांसी पर। पर इस विरोध को रोकिये। क्योंकि इस विरोध से न जाने कितने ऐसे लोग जीते जी मर रहे हैं जिनकी आखरी आस ही आप कि कचहरी है। ये सवाल तो था वकीलों से अब सवाल प्रशासन से है। आप किस प्रकार का रवैया अपनाना चाहते हैं वकीलों के विरुद्ध। रात में गैर कानूनी तरीके से तहसील को हस्तानांतरित करने का काम करते हैं। विरोध होता है तो लाठियां चलाते हैं। फिर विरोध होता है फिर लाठियां चलती हैं। सरकार जागती है और प्रशासन के ज़िम्मेदारों को तलब करती है। बस सरकार का भी काम पूरा हो जाता है। आखिर कब तक इस तरह आप सभी आम जनता को ढाल बना कर अपना स्वार्थ सिद्ध करते रहेंगे। आखिर ये विरोध, ये आक्रोश किसके लिए है? बार काउंसिल ऑफ इंडिया का भी कार्य बहिष्कार करना कितना सही और कितना गलत है ये कोई और नहीं बल्कि अधिवक्ता भाई खुद ही तय करें। आखिर आप भी देश के एक स्तम्भ का अंग हैं। सवाल आप से भी बनते हैं। विरोध कब तक होगा ? एक बार जरा साथ में विरोध करने नहीं बल्कि विरोध को रोकने के लिए काम करें। ये देश आप का है। ये विरोध, ये बंद आपके अहम को तो शांत कर सकता है। पर क्या देश के अहम को बरकरार रख सकता है? क्या हमारे देश में विरोध को ही विकास का रास्ता समझा जाता है? एक बार विरोध नहीं, बंद नहीं साथ में देश के विकास और सुरक्षा के मार्गों को खोलने का काम करें।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें