जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई पर पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह और फिर बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया। लेकिन विपक्ष उनके बयान से संतुष्ट नहीं हुआ। दोनों ही नेताओं ने कहा कि उनके स्वर भी सदन के सदस्यों के आक्रोश के साथ हैं। प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि जम्मू कश्मीर में जो कुछ हो रहा है वो बिना केंद्र सरकार के मशविरे से हो रहा है। मोदी ने कहा, आक्रोश दल का नहीं, यह आक्रोश उस तरफ की बेंचों या इस तरफ की बेंचों का भी नहीं बल्कि पूरे देश का है। हम एक स्वर से अलगाववाद को समर्थन करने वालों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हैं। इससे पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोक सभा को बताया कि उन्होंने जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से मसर्रत आलम बट की रिहाई के बारे में स्पष्टीकरण माँगा है। बट के खिलाफ 1995 से कुल 27 मामले दर्ज हैं जिनमें देश द्रोह के भी मामले हैं। कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर भाजपा की सहमति के बिना जम्मू-कश्मीर सरकार ऐसे कदम उठा रही है तो भाजपा पीडीपी सरकार से अलग क्यों नहीं हो जाती ? मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू-कश्मीर में सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न होने का श्रेय पाकिस्तान और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस समेत अलगाववादियों को भी दिया, पीडीपी के विधायकों ने संसद हमला कांड में फांसी पर चढ़ाए गए आतंकवादी मोहम्मद अफजल के अवशेष मांगे और उसके बाद आलम की रिहाई हुई। इन पुरे हालातों को देख कर केंद्र सरकार का घिरना तय ही था। नरेन्द्र मोदी ने जो भी सदन में कहा वो सुनने में तो बहुत ही अच्छा लग सकता है पर शायद समस्या का यह निदान नहीं है। जिस जम्मू कश्मीर को हम देश की जन्नत कहते हैं वहां इस तरह की घटनाएं देश के लिए कभी भी सही नहीं हो सकती। रही बात भाजपा कि तो यह कहना किसी भी तरीके से ठीक नहीं जान पड़ता कि यह पूरा निर्णय सिर्फ और सिर्फ जम्मू कश्मीर की बीजेपी इकाई का है। नरेन्द्र मोदी जी आप को इस बात का भी ध्यान रखना होगा की जम्मू कश्मीर सरकार में बने रहने की आप की महत्वाकांक्षा कहीं पुरे देश में आप को नुक्सान न पहुंचा दे। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि जम्मू-कश्मीर सरकार बचाए रखने के लिए भाजपा कितनी नरमी बरतेगी? भाजपा के बयान और उनके स्पष्टीकरण में कहीं भी नरेन्द्र मोदी की सरकार का तेवर नज़र नहीं आता। जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र का सपना आप की सत्ता की चाहत कहीं सपना ही न बना रहने दे।
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